पश्चिम बंगाल में विश्व हिंदू परिषद को रामनवमी की रैली की इजाजत ना मिलने से गरमाई सियासत
जहां पर आस्था और धर्म बीच में आ जाता है लोग कट्टर हो जाते हैं चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम या सिक्ख या ईसाई। हमारे हिंदू धर्म में नवरात्र को बड़े धूम धाम से माता के नौ रूपों की पूजा होती है और राम नवमी को और भी हर्षोल्लास होता है। यदि आप किसी की आस्था का विरोध करेंगे या उसके प्रचार प्रसार को रोकेंगे तो लोगों में रोष तो होगा ही और वही हुआ पश्चिम बंगाल में विश्व हिंदू परिषद की रैली के दौरान जो चर्चा का विषय बन गया है।
चुनावी दौर में राम नवमी के दिन पश्चिम बंगाल में सियासत में फिर गर्मा गर्मी का माहौल छा गया है। असल में बात ये हुई कि कोलकाता पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद की बाइक रैली निकलने के कुछ घंटे पूर्व ही उनको बाइक से रैली निकालने की इजाजत देने से मना कर दिया जिससे विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं में रोष उत्पन्न हुआ।
विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं से कहा गया था कि वो रैली के दौरान अपने साथ राम लला की केवल एक ही तस्वीर या बैनर लगाएंगे। रैली रोके जाने पर उनके बीच अत्यधिक रोष था और उन्होने जबर्दस्ती भगवा झंडे और राम की तस्वीर के साथ रैली निकालने का प्रयत्न किया। विश्व हिंदू परिषद की यह रैली पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से होने वाली थी उन्होने रैली में हथियारों के निषेध की बात भी कही थी। इस पर विश्व हिंदू परिषद संगठन के सचिव सचिंद्रनाथ सिन्हा ने भी कहा था कि हमारी इस अधिकृत रैली में पुलिस प्रशासन द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन होगा कोई भी कार्यकर्ता किसी भी प्रकार के हथियारों को साथ नहीं रखेंगे।
सचिंद्रनाथ ने निश्चित तौर पर यह बात कही थी कि दक्षिम बंगाल में विश्व हिंदू परिषद की 700 छोटी-बड़ी रैलियां करने की योजना है। यह भी कहा कि चुनाव की वजह से उन्होने उत्तर बंगाल में कम से कम रैलियां प्रस्तावित की गई थीं। विश्व हिंदू परिषद की इस रैली का संबंध भारतीय जनता पार्टी से भी जोड़ा जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि बीजेपी चुनाव के दौरान सांप्रदायिक माहौल उत्पन्न करके वोट बैंक की राजनीति खेलने का प्रयास करेगी।
पश्चिम बंगाल सांप्रदायिक मामलों के लिए संवेदनशील है, पिछले वर्ष राम नवमी के दिन पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की चर्चा से पूरा देश दहला था। यह विवाद राम नवमी के दिन बजाए जा रहे गानों को लेकर हुआ था। इस दंगे में रानीगंज में महेश मंडल की और आसनसोल में सिबतुल्ला रशीदी की मौत हो गई थी। इस सांप्रदायिक हिंसा में कई लोग घायल हुए और कई घरों और दुकानों को जला के खाक कर दिया गया। इस घटना पर राजनीति दलों द्वारा खूब सियासत बाजी भी खेला गया। ऐसी घटना दुबारा उत्पन्न न हो इसलिए इस वर्ष पुलिस प्रशासन ने विश्व हिंदू परिषद की रैली पर रोक लगा दी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



