महाशिवरात्रि के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
महाशिवरात्रि का यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार यह शुभ संयोग 59 सालों बाद बना है। इस बार की महाशिवरात्रि साधना करने वालों के लिए अत्यंत शुभ है। महाशिवरात्रि के अवसर पर साधक भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उपवास करते हैं। शास्त्रों के अनुसार बताए गए नियमों का पालन करने पर उपवास का पूर्ण फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में शिव की पूजा करने से भक्तों पर शिव की कृपा बनी रहती है।
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मान्यताओं के अनुसार 59 सालों बाद बन रहे इस संयोग में शुभ काल के दौरान भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें। शास्त्रों के अनुसार पूजन के दौरान भगवान शिव की परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर आप भी भोले बाबा को प्रसन्न करना चाहते हैं तो मंदिर में पूजा के बाद परिक्रमा करना ना भूलें। परिक्रमा करते समय इस बात का ध्यान अवश्य दें की परिक्रमा हमेशा शिवलिंग के बाएं ओर से शुरू करें। जहां भगवान शिव को चढ़ाए हुआ जल वापस निकलता है वहां से पुनः लौट कर अपनी परिक्रमा पूरी करें। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को चढ़ा हुआ जल लांघना नहीं चाहिए। अतः परिक्रमा के दौरान इस बात का ध्यान दें कि भगवान शिव को चढ़ाए हुए जल को पार ना करें।

यदि आपने महाशिवरात्रि के अवसर पर उपवास रखा है तो अपने खाने का विशेष तौर पर ध्यान दें। उपवास वाले दिन जूस का सेवन अधिक से अधिक करें ताकि शरीर में पानी की कमी से बचे रहें। इस व्रत में आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। जैसे कुट्टू के आटे की पूरी, मूंगफली, मखाना, आलू और फल का सेवन करके अपने व्रत को सार्थक कर सकते हैं।

