ईशनिंदा के आरोप के कारण पाकिस्तान के हिंदुओं पर टूटा दंगाइयों का कहर
पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां पर इस्लाम को प्राथमिकता दी जाती है और वहां पर अल्पसंख्यक लोगों को हमेशा ही दबाने का प्रयास किया जाता है। जब पाकिस्तान बना था। उस समय वहां पर हिंदुओं की संख्या बहुत ज्यादा थी। मगर धीरे-धीरे साजिश के तहत हिंदुओं को मार मार कर उनको खत्म किया जाने लगा। अल्पसंख्यकों को होने वाले अत्याचारों की कहानी समय-समय पर सामने आती रहती है। हाल ही में एक बार फिर से हिंदुओं के ऊपर कहर टूट पड़ा है। एक डॉक्टर द्वारा ईशनिंदा पर हिंदू लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और हिंदुओं की सभी दुकानों को जला दिया गया है। यह हिंसा बुधवार को भी जारी रही।
यह है पूरा मामला
दरअसल अल्पसंख्यक समुदाय के एक डॉक्टर द्वारा धार्मिक ग्रंथ का पन्ना फाड़ कर उसमें दवा लिखे जाने को लेकर एक इमाम ने शिकायत की थी। यह बात फैलने पर उग्र दंगाइयों ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर कई हिंदुओं की दुकानों में आग लगा दी। जिसमें डॉक्टर की क्लीनिक मेडिकल स्टोर और दो अन्य दुकानें थीं। जिससे लाखों का नुकसान हो गया। यह घटना पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मीरपुर खास की है। दंगाइयों ने टायरों में आग लगाकर चक्का जाम कर दिया। जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स को बुलाना पड़ा। इसके अलावा कुछ दंगाइयों के खिलाफ मामला भी दर्ज कर लिया गया है। यही नहीं सरकार का कहना है कि वह पीड़ित हिंदुओं को मुआवजा देगी।
पाकिस्तान में हिंदुओं को बनाया जा रहा है निशाना
दरअसल पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक पाकिस्तान में 90 लाख हिंदू रहते हैं। जबकि पाकिस्तान सरकार के मुताबिक पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या केवल 75 लाख है। पाकिस्तान हिंदू काउंसिल ने सरकार से शिकायत की थी कि ईशनिंदा के नाम पर उनसे दुश्मनी निकाली जाती है और उन को निशाना बनाया जाता है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत और कराची में हिंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा है। पाकिस्तान के हिंदू अक्सर ही इस तरह के हमलों के बाद खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



