विश्वविद्यालयों को लेकर सीमित हुए राज्यपाल के अधिकार
बंगाल सरकार ने विश्वविद्यालयों को लेकर राज्यपाल के अधिकारों को सीमित करने के लिए नियमों में बदलाव किया है। मंगलवार को विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री सह शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने गैजेट अधिसूचना के जरिए वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी 2019 को सदन में रखा जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। नए नियम के अनुसार राज्यपाल जो कि विश्वविद्यालयों के लिए कुलाधिपति भी होते हैं उन्हें अब किसी भी काम के लिए शिक्षा विभाग की जड़ी विश्वविद्यालय से संपर्क स्थापित करना होगा।

इस नए नियम के तहत विश्वविद्यालयों को लेकर राज्यपाल का अधिकार सीमित हो जाएगा। नए नियम के अनुसार विश्वविद्यालय सेनेट या किसी अन्य मीटिंग के लिए राज्यपाल को विश्वविद्यालय के कुलपति से तारीख और कार्य सूची जानने होगी इसके बाद ही राज्यपाल बैठक बुला सकते हैं। पहले राज्यपाल की अनुमति के अनुसार ही बैठक बुलाई जाती थी इतना ही नहीं बैठक को बुलाने के लिए कुलपति को पहले शिक्षा विभाग से विचार विमर्श करनी होगी। आपको बता देंगे पहले विश्वविद्यालय में मानद उपाधि देने के लिए जिन लोगों की सूची तैयार की जाती थी उसे पहले राज्यपाल के पास भेजा था और आवश्यकता पड़ने पर राज्यपाल उस तालिका में बदलाव करने की क्षमता रखते थे। लेकिन जो नया नियम बनाया जा रहा है उसमें विश्वविद्यालय के कुलपति राज्य के शिक्षा विभाग को सूची भेजेंगे उसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से इस राज्यपाल के पास भेज दिया जाएगा।
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पहले यह नियम भी था कि किसी भी विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के जरिए 3 लोगों के नाम की सूची तैयार कर शिक्षा विभाग राज्यपाल के पास भेजता था। उन 3 लोगों में से किसी को भी राज्यपाल कुलपति के तौर पर नियुक्त कर सकते थे। लेकिन अब शिक्षा विभाग सीधे तौर पर कुलपति का चुनाव करेगा और एक ही व्यक्ति का नाम राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जिसे अनुमति देने के लिए राज्यपाल बाध्य होंगे।

