पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन से डरे सहमे हिंदू भारत पहुंचे
पाकिस्तान विश्व का सबसे दोगला और कायर देश है। एक तरफ तो वह जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा कश्मीरियों के ऊपर अत्याचार करने की बात को दुनिया भर में गाता रहता है तो दूसरी तरफ खुद ही बलूचिस्तान के लोगों को निर्दयता पूर्वक मारता रहता है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर तरह तरह के अत्याचार किए जाते हैं। यह बात एक बार नहीं बल्कि कई बार विश्व के समक्ष आ चुकी है। इसके बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस पर पूरी तरह से खामोश हैं। पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक समुदाय काफी डरे और सहमे हुए हैं और इस कठिन परिस्थिति में उनकी उम्मीद की किरण भारत की तरफ नजर आती है। ऐसे में पाकिस्तान में प्रताड़ित कुछ हिंदू परिवार धर्म परिवर्तन से डरकर अटारी वाघा बॉर्डर के जरिए भारत पहुंचे।
जबरन करवाया जाता है धर्मांतरण
पाकिस्तान में कट्टरपंथियों और इस्लामिक मौलाना और मौलवियों का इतना प्रभाव है कि वहां पर रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है। पाकिस्तान में लगातार हिंदू नाबालिग लड़कियों को उठाकर बंदी बनाया जाता है और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराकर उनका निकाह करा दिया जाता है। पाकिस्तान में इस तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार को कराची के निकटतम तंदोआदम क्षेत्र से फिर से एक 14 साल की हिंदू लड़की का अपहरण कर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया। जिसके विरोध में कराची में हिंदू विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तान में हो रहे अल्पसंख्यकों के ऊपर इस तरह के अत्याचार से अटारी वाघा बॉर्डर के जरिए 120 लोग भारत में आए। यह सब भारत में धार्मिक वीजा के तौर पर आए हैं।
पाकिस्तान से भारत आए इन लोगों ने बताया कि पाकिस्तान में हर महीने औसतन 25 हिंदू नाबालिक लड़कियों का अपहरण होता है। जिसके बाद उनका धर्मांतरण करा कर उनका निकाह करा दिया जाता है। आजादी के समय जब पाकिस्तान बना था उस समय हिंदू पाकिस्तान में कुल आबादी का 20% थे। मगर अब यह 1% से भी कम बचे हैं।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



