क्यों की जाती है कार्तिक मास में तुलसी की पूजा, जानियें ये खास बात
आप जानते होंगे कि शरद पूर्णिमा के बाद से कार्तिक मास की शुरूआत होती है। इस साल 31 अक्टूबर 2020 को शरद पूर्णिमा पड़ी, और 1 नवंबर 2020 से कार्तिक का महीना प्रारंभ हो गया है। विष्णु भगवान इस महीने जल में निवास करते हैं, इसलिए इस माह में सुबह सूर्योदय के पहले स्नान करने से बहुत ज्यादा मात्रा में पुण्य और धन की प्राप्ति होती है।
स्नान करने से होती है पुण्य की प्राप्ति
इसके साथ ही कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष महत्त्व माना गया है। कार्तिक मास के पूरे महीने में माता तुलसी के सामने दीपक जलाया जाता है। इससे बहुत पुण्य और धन का लाभ होता है। जिससे सुख-संपदा और मान-सम्मान बढ़ता है। यह मान्यता है कि कार्तिक मास में चांद-तारों की मौजूदगी में सूर्योदय से पहले स्नान करने से ही पुण्य की प्राप्ति होती है।

खास बात
आप जानते होंगे कि कार्तिक के महीने में तुलसी के विवाह का आयोजन होता है। तुलसी का विवाह करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। घर सुख संपदा से भर जाता है। सम्मान और वैभव की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह के लिए गमले को चारों तरफ से सजा लेते है और गन्ने से मंडप बनाकर उसके ऊपर सुहाग की चुनरी ओढ़ाते है।

इस नियम से करें तुलसी पूजन
- आपको बता दे कि कभी भी शाम के समय तुलसी की पत्ती नहीं तोडना चाहिए।
- पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी, रविवार के दिन व संक्रान्ति के दिन तीनों संध्याकाल {सुबह, दोपहर और शाम} में तुलसी पत्र नहीं तोडना चाहिए।
- जब घर में सूतक लगा हो अर्थात बच्चे के जन्म और किसी के मृत्यु के समय भी तुलसी की पत्ती नहीं तोड़ना चाहिए। साथ ऐसी दशा में तुलसी पत्र भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। क्योंकि तुलसी श्री हरि के स्वरूप वाली हैं।
- तुलसी को दांतों से चबाकर नहीं खाना चाहिए।
- स्नान के बाद तुलसी को नियमित रूप से जल चढ़ाना चाहिए।

