इमरान के फैसले के बाद पाकिस्तान में मचा हाहाकार, सड़कों पर उतरे लोग
पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिन-प्रतिदिन और भी ज्यादा कमजोर होती चली जा रही है। पाकिस्तान दिन पर दिन कर्ज में डूबता हुआ चला जा रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक मुद्रा भी लगातार कमजोर होती जा रही है। पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा मिलने वाले कर्ज़ की मंजूरी मिल गई है। मगर उसके बावजूद पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। आम आदमी से लेकर बड़े बड़े बिजनेसमैन तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं और उन्होंने जगह-जगह पर चक्काजाम कर दिया है। विपक्षी दलों को भी इस बंद का पूरी तरह से समर्थन मिला है। लोगों का कहना है कि कर्ज के कारण सरकार कर का दायरा बढ़ा रही है उन्हें इससे आपत्ति नहीं है। मगर इसके लिए बल प्रयोग किया जा रहा है जो कि गलत है।
इमरान के फैसले से पाकिस्तान में मचा हाहाकार
दरअसल पाकिस्तान में उद्योग धंधों की हालत बहुत ही ज्यादा खस्ता है। पाकिस्तान में कारोबारियों के संगठन के अध्यक्ष अजमल बलोच ने बताया है कि यह हड़ताल पाकिस्तान के विरोध में नहीं है। बल्कि यह हड़ताल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के उन नियमों के विरोध में है जिसे उसने पाकिस्तान के ऊपर थोपे हैं। दरअसल पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा दिए गए लोन के बाद पाकिस्तान को कुछ नई शर्तों को अपने देश में लागू करना होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नियम के मुताबिक पाकिस्तान को अपनी जनता को दी जा रही करों में छूट को वापस लेना होगा और उनमें नए कर लगाने होंगे। साथ ही आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को अपनी सरकारी नौकरी में भी कटौती करनी पड़ेगी ताकि आर्थिक बोझ कम किया जा सके। इन नियमों के खिलाफ पाकिस्तान के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
आतंकवाद से आर्थिक तंगी तक का सफर
पाकिस्तान ने अपने देश में पल रहे आतंकवाद को संरक्षण प्रदान करने के लिए कभी भी अपने रक्षा बजट को कम नहीं किया। भारत से प्रतिद्वंद्विता के कारण पाकिस्तान ने काफी पैसा अपने रक्षा सौदों पर बर्बाद कर दिया। जिस कारण पाकिस्तान की हालत आज ऐसी है कि वह विश्व के सभी बड़े देशों से कर्ज लिए बैठा है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



