सत्ता की भूखी : कांग्रेस पार्टी
कर्नाटक चुनाव परिणाम ने एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी की खटिया खड़ी कर दी है। 2014 के बाद से लगातार ही लगभग हर राज्यों में भाजपा की जीत, कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बनते जा रही है। अभी 20 राज्यों में भाजपा या उसके गठबंधन की सरकार है। 21वें राज्य कर्नाटक में सरकार बनने को लेकर अभी अटकले हैं।
मई 2014 में जब मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब भाजपा या एनडीए की सिर्फ 8 राज्यों में सरकार थी, वहीं कांग्रेस की 14 राज्यों में। अब कर्नाटक में अगर भाजपा की सरकार बनती है तो कांग्रेस सिमटकर सिर्फ 3 राज्यों (पुड्डुचेरी, पंजाब और मिजोरम) में रह जाएगी। वही दिल्ली समेत बाकि 7 राज्यों में दूसरे दलों की सरकार है।
2014 के बाद से लगातार प्रधानमंत्री मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता और जीत से बौखलाए कांग्रेस पार्टी का उनपर हमेशा ही आरोप – प्रत्यारोप लगाना ही उसकी हार का मुख्य कारण बनते जा रही है। कांग्रेस पार्टी लगातार ही आरोप लगाते आ रही है कि मोदी जी हिन्दू और मुस्लिम को बाँटने का काम कर रहे हैं, मोदी जी मुस्लिम विरोधी हैं जबकि सच्चाई तो ऐ है कि ऐसे भाषण दे – देकर कांग्रेस खुद ही देश को बाँटने का काम कर रही है। लेकिन ऐ लोकतंत्र है भईया और जनता सब समझती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी जी के किये हुए सारे वादे अभी तक पुरे नहीं हुए लेकिन फिर भी इन चार सालों में कोई कम काम भी नहीं हुए।
अब जब कांग्रेस पार्टी कर्नाटक चुनाव बुरी तरह से हारी है तो फिर से बहुमत के करीब खड़ी भाजपा को बस रोकने भर के लिए तत्काल ही जेडीएस को समर्थन देने की घोषणा कर यह भी साबित कर दिया कि कांग्रेस का एजेंडा देश और प्रदेश नहीं, बल्कि अपनी सत्ता किसी भी तरह कायम रखना है, चाहे उसके लिए कितना भी नीचे क्यों ना गिरना पड़े। अगर कांग्रेस अपनी सोच देश के लिए भविष्य का वैकल्पिक एजेंडा देकर जनता को आकर्षित करती तो शायद आज यह दिन ना देखना पड़ता।
अगर कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में सरकार बनाती भी है तो यह जबरदस्ती की सरकार होगी क्योंकि कर्नाटक की जनता ने उसे पूरी तरह से नाकारा है और भाजपा के हाथ अपने राज्य का कमान सौंपने का मन बनाया है। यह सैंवधानिक मजबूरी है कि बहुमत का आंकड़ा पूरा होना चाहिए, जिससे भाजपा पीछे छूट गई। कांग्रेस ने तुरंत ही जेडीएस को समर्थन देने की घोषणा कर दी जो उसकी तुच्छ राजनीति का प्रमाण देती है।
इससे पहले भी 2004 में दोनों पार्टी की असफल गठबंधन रह चुकी है। जनता उसे भी भूली नहीं होगी। कांग्रेस का अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए जबरदस्ती की सरकार बनाने की कोशिश करना क्या जनता को खुश कर सकती है……, क्या जनता की जरूरतों को पूरा कर सकती है….?
Writer at India Alive

