बाल यौन शोषण से जुड़ी कुछ बातें
बाल यौन शोषण, आज हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई है, और चिंताजनक बात तो ये है कि ऐसे मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। आज पूरा देश बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे यौन शोषण के मामले से परेशान है। बच्चों को पता ही नहीं चलता कि वो कब और कैसे किसी के हवस के शिकार बन जाते हैं।
हमारे पुरे देश में न जाने कितने ही ऐसे वहशी दरिंदे हैं जो मासूमों को अपने हवस का शिकार बनाकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं। इन्हीं सब बातों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने बाल यौन शोषण से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव करने का फैसला लिया है।
कानून में बदलाव के बाद बचपन में यौन शोषण के शिकार हुए बच्चे 25 साल की उम्र तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इस प्रपोजल पर हाल ही में केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी की अध्यक्षता में हुई रिव्यु मीटिंग में चर्चा हुई थी।
क्या है बाल यौन शोषण
बाल यौन शोषण, शोषण का एक प्रकार है जिसमे एक व्यस्क या बड़ा किशोर अपने आनंद के लिए एक बच्चे का यौन शोषण करता है। जितना घृणित ये परिभाषा से लग है, वास्तविकता में भी इतना ही शर्मनाक है। घिन आती है ऐसे कुंठित मानसिकता वाले लोगों से। बाल यौन शोषण को बच्चे के साथ छेड़छाड़ के रूप में भी परिभाषित किया जाता है।
बाल यौन शोषण कई रूपों में होता है जिससे माता-पिता और बच्चों दोनों को अवगत कराकर रोका जा सकता है। ये इसलिए होता है क्योंकि बच्चों को अश्लील या गलत तरीके से छूने के बारे में पता नहीं होता है और फिर जब बच्चें किसी तरह के छेड़छाड़ का शिकार होते हैं तो इसे पहचानने में असक्षम होते हैं और इस तरह ये माता-पिता के लिए बहुत आवश्यक हो जाता है कि वो अपने बच्चों से सभी तरह से छूने के बारे में खुल कर बात करें।
बाल यौन शोषण में, यौन उत्पीड़न (जहाँ एक व्यस्क नाबालिक बच्चे को अपनी यौन इच्छाओं कि पूर्ति के लिए इस्तेमाल करता है) और यौन शोषण (जहाँ एक बच्चे से वेश्यावृति कराकर लाभ कमाया जाता है) जैसे अपराध शामिल है।
एक बच्चे को गलत तरीके से छूने और संपर्क बनाने के बारे में जागरूक करना चाहिए जिसमे दुलारना, भद्दी टिप्पणियां और सन्देश देना, मस्टरबेसन, सम्भोग, ओरल सेक्स, वेश्यावृति और अश्लील साहित्य शामिल है।
बाल यौन शोषण से निपटने के लिए कानून
सीआरपीसी के सेक्शन 468 के तहत अभी बाल यौन शोषण समेत ऐसे किसी भी अपराध के लिए तीन साल तक कि जेल की सजा है। उसके लिए घटना के तीन साल के अंदर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।
जिन अपराधों के लिए सिर्फ ज़ुर्माना है, उनकी शिकायत के लिए समय सीमा छह महीने है। वहीं जिन अपराधों की सजा एक साल की जेल है, उनकी शिकायत एक साल तक की जा सकती है।
नए नियम के मुताबिक अगर शिकायत की समय सीमा बढ़ा दी जाती है तो बचपन में यौन शोषण का शिकार होने वाला बच्चा 18 की उम्र का होने के सात साल बाद तक शिकायत दर्ज करा सकता है। कई बार ऐसा होता है कि पीड़ित व्यक्ति जब व्यस्क होता है तब वह अपने साथ हुई घटना को सही मायने में समझ पता है और इस बारे में बात करने में सक्षम होता है।
Writer at India Alive

