नोटबंदी के आंकड़ों को लेकर हमलावर हुआ विपक्ष, चिदंबरम ने कहा: RBI को आनी चाहिए शर्म
नोटबंदी के फैसले को ‘राष्ट्रविरोधी’ बताते हुए विपक्षी दलों ने इस कदम को लेकर सरकार को आड़े हाथ लिया वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को रिजर्व बैंक की तरफ से जारी आंकड़ों का इस्तेमाल उस पर निशाना साधने के लिए करते हुए कहा कि बंद किए गए करीब एक फीसदी नोट वापस नहीं आना ‘‘आरबीआई के लिए शर्म की बात है’’. दूसरी तरफ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी का बचाव किया और इसके कई फायदे भी गिनाए. बात दें कि बुधवार को आरबीआई की 2016-17 की सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एक हजार रुपए के 1.4 प्रतिशत नोटों को छोड़कर बाकी बैंकिंग प्रणाली में लौट आए हैं.
A colossal failure which cost innocent lives and ruined the economy. Will the PM own up? #DemonetisationDisaster https://t.co/YXNdW8xBTL
— Office of RG (@OfficeOfRG) August 30, 2017
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि नोटबंदी से न केवल आरबीआई की संस्थागत शुचिता पर धब्बा लगा है बल्कि विदेशों में भारत की विश्वसनीयता पर भी बट्टा लगा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के एक भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई.
चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, ‘‘99 फीसदी नोट कानूनी रूप से बदले गए. क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिये तैयार की गयी योजना थी?’’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नोटबंदी के कदम के पीछे जो अर्थशास्त्री था वह ‘‘नोबल पुरस्कार का हकदार’’ है क्योंकि आरबीआई के पास 16,000 करोड़ रुपये आए लेकिन नए नोटों की छपाई में 21,000 करोड़ रुपए खर्च हो गए.
Rs 16000 cr out of demonetised notes of Rs 1544,000 cr did not come back to RBI. That is 1%. Shame on RBI which 'recommended' demonetisation
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) August 30, 2017
RBI 'gained' Rs 16000 crore, but 'lost' Rs 21000 crore in printing new notes! The economists deserve Nobel Prize.
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) August 30, 2017
99% notes legally exchanged! Was demonetisation a scheme designed to convert black money into white?
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) August 30, 2017

