डोकलाम में भारत के कूटनीतिक जीत की कहानी
भारत ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कूटनीतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता पाई है। राजनीतिक विपक्ष भले ही अंतराष्ट्रीय यात्राओं का मज़ाक उड़ाए, लेकिन यह स्पष्ट है कि इन यात्राओं के परिणाम सकारात्मक रहा है।
पिछले दो महीनों से भूटान का ‘डोकलाम’ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तनाव का वजह बना था। विवाद यह था कि भूटान के इस भूभाग पर चीन अपनी सड़क बना कर क़ब्ज़ा करना चाहता था। चूँकि भारत और भूटान की आपसी सहमति से भूटान की सुरक्षा का दायित्व भारत को ही है, अतः भारत ने चीन इस अवैध क़ब्ज़े का कड़ा विरोध करते हुए अपनी सेना भेज दी।
चीन ने इस प्रकार के अवैध क़ब्ज़े की कोशिश कई अन्य देशों के साथ भी किया है। साउथ चाइना सागर पर तो चीन को कई देशों का विरोध झेलना पड़ा। डोकलाम मुद्दे पर भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि चीन दबाव में भारत नहीं झुकेगा। मोदी सरकार अमेरिका और जापान सहित विश्व प्रमुख देशों को अपने पक्ष में करने में सफल रही।
चीन अपनी बात पर अड़ा रहा और सरकारी मीडिया के माध्यम से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा। इसी बीच भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डोकलाम विवाद जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। आज से एक हफ़्ते पहले दिए इस वक्तव्य पर न केवल चीनी मीडिया बल्कि आम चीनी जनता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जिसे बीबीसी ने भी प्रकाशित किया।
लेकिन किसी को इस बात का अन्दाज़ा नहीं था कि एक हफ़्ते के अंदर डोकलाम विवाद को सुलझा लिया जाएगा। आज भारत और चीन की सेनायें वापस हो गयी हैं। डोकलाम पूर्ववत भूटान का अभिन्न हिस्सा है। यह भारत की कूटनीतिक जीत है।
कई जानकारों का कहना है कि यह सेनाएँ हटाने आपसी समझौता भारत की महानतम कूटनीतिक सफलताओं में से एक है। जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और विदेशमंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व का श्रेय जाता है।

Political Analyst and Commentator, Interested in Political Strategy, Election Campaigns and E-Governance Implementation.

