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कश्मीर में स्थायी शांति के लिए अगले चरण पर काम शुरू

आतंकियों के काफी हद तक सफाए और अलगाववादियों को हाशिए पर खड़ा करने के बाद अब राजनीतिक स्तर पर कश्मीरियों को साधने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। इसके तहत अगले कुछ महीनों में कई राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के दौरे पर जाएंगे। वहीं पाकिस्तानी फंडिंग बंद होने के बाद कुछ अलगाववादी नेता भी सरकार से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को ही लालकिले से अपने भाषण में कश्मीर में अगली रणनीति का संकेत दे दिया था।

राजनीतिक संपर्क साधने की दिशा में सबसे पहले कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर पहुंचेगा। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में यह प्रतिनिधिमंडल 10 सितंबर को जम्मू और 16 सितंबर को घाटी का दौरा करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल बाद में लद्दाख भी जाएगा। कांग्रेस के पालिसी ग्रुप के तहत जाने वाले इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य घाटी के ताजा हालात की समीक्षा करना और वहां के विभिन्न वर्गो से इसको लेकर विचार-विमर्श करना है। पिछले साल आतंकी बुरहान वानी की मौत से कश्मीर के बिगड़े हालात के बाद कांग्रेस का पहला उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के तीनों भागों का दौरा करेगा।

कांग्रेसी नेताओं के दौरे के बाद राजनाथ सिंह गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कश्मीर पहुंचेगे। वैसे अभी तक राजनाथ सिंह के दौरे की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इसकी तैयारी शुरू हो गई है और तारीख का ऐलान भी जल्द कर दिया जाएगा। पिछले साल कश्मीर में भारी हिंसा के बीच भी राजनाथ सिंह कश्मीर का दौरा कर चुके हैं और वहां के विभिन्न वर्गो के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की थी। लेकिन उस समय हुर्रियत नेताओं ने राजनाथ सिंह को ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी। देखना यह है कि बदली परिस्थितियों में हुर्रियत नेताओं का रवैया बदलता है या नहीं।

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