इस दिन मनाया जाएगा सकट चौथ का पर्व, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और महत्व
हिंदू धर्म में कई सारे व्रत व त्योहार पड़ते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कुछ त्योहार के बारे में लोगों को विशेष जानकारी नहीं होती है। आज हम आपको एक ऐसे व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं जो विशेषरूप से संतान की लंबी आयु व सुखी जीवन के लिए ही मनाया जाता है। आज हम आपको सकट चौथ व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका महत्व काफी ज्यादा होता है। बताते चलें कि ये व्रत हर साल माघ माह की चतुर्थी के दिन रखा जाता है। इस बार यह 13 जनवरी को पड़ रही है, इस व्रत को तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन सकट चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं भगवान गणेश की पूजा अर्चना करती हैं। ये व्रत पूरे दिन निर्जला रखा जाता है।
ये है मुहू्र्त
सकट चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 13 जनवरी की शाम 5 बजकर 32 मिनट से होगा और जिसकी समाप्ति 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर होगी। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 33 PM है।

ये है व्रत विधि
जो भी महिलाएं ये व्रत रखती हैं उनको पूरे दिन बिना खाए पिए रहना होता है और रात के समय चंद्रमा के उदय होने के साथ ही अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रख संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस व्रत की पूजा में गुड़, तिल, गन्ने और मूली का प्रयोग किया जाता है। शाम को चंद्रमा के निकलने के बाद व्रत रखने वालों को तिल, गुड़ का अर्घ्य देकर चंद्र देव की पूजा करनी होती है। इस दिन गुड़ या चीनी की चाशनी में काले तिल को मिलाकर लड्डू तैयार किया जाता है। जिसका भोग भगवान गणेश को लगाया जाता है।
संकट चौथ व्रत कथा
इस व्रत के पीछे एक कहानी भी है जिसमें बताया गया है कि राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। वह मिट्टी के बर्तन बनाता, लेकिन वे कच्चे रह जाते थे। एक पुजारी की सलाह पर उसने इस समस्या को दूर करने के लिए एक छोटे बालक को मिट्टी के बर्तनों के साथ आंवा में डाल दिया। उस दिन संकष्टी चतुर्थी का दिन था। उस बच्चे की मां अपने बेटे के लिए परेशान थी। उसने गणेश जी से बेटे की कुशलता की प्रार्थना की। दूसरे दिन जब कुम्हार ने सुबह उठकर देखा तो आंवा में उसके बर्तन तो पक गए थे, लेकिन बच्चो का बाल बांका भी नहीं हुआ था।
UPTET को लेकर आया ये नया नोटिफिकेशन, शिक्षक बनने का सपना देखने वाले जरूर पढ़ें
वह डर गया और राजा के दरबार में जाकर सारी घटना बताई। इसके बाद राजा ने उस बच्चे और उसकी मां को बुलवाया तो मां ने सभी तरह के विघ्न को दूर करने वाले संकष्टी चतुर्थी का वर्णन किया। इस घटना के बाद से महिलाएं संतान और परिवार के सौभाग्य के लिए सकट चौथ का व्रत करने लगीं। यह कहानी इस व्रत को करने वाली महिलाएं सुनती हैं और फिर अपना व्रत खोलती हैं।

