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निर्भया के दोषी ने फांसी से बचने के लिए फिर अपनाया एक नया पैंतरा, अब चली ये चाल

निर्भया केस को आज 7 साल बीत चुके हैं लेकिन आज भी लोग इस केस के आरोपियों को फांसी पर लटकते देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं। वहीं ये भी बता दें कि निर्भया केस के दोषी अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि वो इस फांसी से बच सके। तभी तो खबरें है कि निर्भया के दोषी सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका) दायर करने की तैयारी में हैं ताकि उन्हें राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने से पहले एक और कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने का मौका मिले, जिससे उन्हें और समय जीने का अवसर मिल जाए।

निर्भया के दोषी ने चली नई चाल

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद निर्भया की मां की याचिका पर दिल्ली पटियाला हाउस ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई थी। जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने जेल प्रशासन को आदेश दिया था कि वह दोषियों को नोटिस जारी कर उनसे पूछे कि पुनर्विचार याचिकाओं के खारिज होने के बाद वह अब अपने बचाव में कितने दिन में और क्या कानूनी रास्ता अपनाएंगे?

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ऐसे में निर्भया की मां ने निचली अदालत से दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए ब्लैक वारंट जारी करने की मांग की और तो और यह भी बता दें कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को बुधवार को नोटिस जारी कर दिया था, जिसमें उन्हें राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने के लिए 7 दिन को मोहलत दी गई है।

हालांकि ये नोटिस दिल्ली जेल नियम 837 के तहत जारी किया गया है जिसमें दोषियों को राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने के लिए नोटिस मिलने के बाद सात दिनों का समय दिया जाता है। और इस दौरान अगर दया याचिका दायर नहीं होती है तो जेल प्रशासन दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। ट्रायल कोर्ट में अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। हालांकि यह भी सच है कि अरोपी अक्षय की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, जबकि अन्य तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। आरोपी विनय के नाम से दया याचिका राष्ट्रपति के पास अंतिम फैसले के लिए लंबित है।

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