क्या हो सकता है चंद्रयान-2 के लैंडर का संपर्क इसरो से
चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का संपर्क इसरो के वैज्ञानिकों से नहीं रहा। यह मिशन केवल 5% असफल रहा। इसरो के चेयर परसन की मानें तो यह मिशन 95% सफल रहा। क्योंकि यह अपनी कक्षा में पहले ही सही जगह पहुंच चुका था। इस असफलता के बाद भले ही देश वासियों में मायूसी है लेकिन गर्व उससे कहीं ज्यादा है।
चंद्रयान-2 के लैंडर पर देर रात तक रही प्रधानमंत्री की नजर
इसरो के चीफ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी नजर चंद्रयान-2 की लैंडिंग पर थी।लेकिन अचानक 2.1 की दूरी पर ही वैज्ञानिक बोल पड़े की चंद्रयान-2 से सम्पर्क बनाए रखना अब मुश्किल है। देश की बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे कदम के अचानक रुक जाने पर पूरे देश में मायूसी की लहर दौड़ पड़ी। यहां तक कि इसरो के चीफ सिवन प्रधानमंत्री के गले लग कर रो पड़े।

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पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आप वह लोग हैं जो मां भारती के जय के लिए जीते हैं।उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रयास का क्षेत्र है, हम फिर से प्रयास करेंगे और चंद्रमा तक पहुंच कर ही रहेंगे। हर छोटी असफलता एक बहुत बड़ा हौसला देकर जाती है।
वहीं इसरो चीफ के सिवन ने बताया, हमें चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की लोकेशन मिल गई है और ऑर्बिटर ने लैंडर की एक थर्मल इमेज क्लिक की है। लेकिन, अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हम संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही इससे संपर्क कर लिया जाएगा।
लैंडर का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर दिया गया था। इसे चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसे एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करना था। लैंडर विक्रम के भीतर 27 किलोग्राम वजनी रोवर प्रज्ञान था।

