एनआरसी सूची से बाहर लोगों का क्या करेगी भारत सरकार?
31 अगस्त के दिन असम में चल रहे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की आखिरी सूची घोषित कर दी गई। इस सूची के आने के बाद पता चला कि असम के 19.07 लाख लोग इस सूची से बाहर हो गए हैं। अब ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जो लोग खुद को भारतीय नहीं साबित कर पाए। उन्हें भारत सरकार कहां ले जाएगी? क्या उन्हें उनके देश में वापस भेजा जाएगा? ऐसे कई सवाल लोगों के मन में आ रहे हैं।
असम सरकार ने घोषणा की थी कि एनआरसी सूची से बाहर लोगों को सरकार किसी भी तरह से हिरासत में नहीं लेगी बल्कि तब तक उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। जब तक की विदेशी न्यायाधिकरण उन्हें विदेशी ना घोषित कर दें। इस सूची से असंतुष्ट लोग 120 दिनों के अंदर विदेशी न्यायाधिकरण में संपर्क कर सकते हैं।
एनआरसी सूची से बाहर लोग कर सकते हैं अपील
असम सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए यह घोषणा कर दी थी कि सूची से बाहर हुए 19 लाख लोग सरकार द्वारा हिरासत में नहीं लिए जाएंगे। बल्कि वह फॉरेन ट्रिब्यूनल का फैसला आने तक इंतजार करेंगे। इस मामले के निपटारे के लिए गृह मंत्रालय ने 400 फॉरेन ट्रिब्यूनल का गठन किया है। फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपील की समय सीमा 60 से 120 दिन तक की है। यदि कोई ट्रिब्यूनल में अपना केस हार जाता है तो उसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील कर सकता है। उसके बाद ही लोगों को हिरासत में लिया जा सकेगा।
नहीं है सरकार की कोई स्पष्ट पॉलिसी
24 मार्च 1971 के बाद आए हुए लोगों को अपनी नागरिकता का प्रमाण देना पड़ा है। मगर इस सूची में कई खामियां हैं। कई ऐसे लोगों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है जो भारत के नहीं है तो वहीं भारत सरकार को अपनी सेवाएं देने वाले लोग भी इस सूची से बाहर हो गए हैं। एनआरसी सूची से बाहर लोगों के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट पॉलिसी भी नहीं है।
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