पिता की मौत के बाद भी इस महिला हाकी खिलाड़ी ने नहीं छोड़ा अपना खेल, जीतकर लौटी
हॉकी भले ही हमारा राष्ट्रीय खेल हो मगर हमारे देश के लोग कभी भी हॉकी खेल में इतनी रुचि नहीं दिखाते जितना वह क्रिकेट में दिखाते हैं। क्रिकेट के कारण हमारे देश में अन्य खेलों के खिलाड़ियों की प्रतिभाएं दबी रह जाती हैं। वह निखर कर सामने नहीं आ पातीं क्योंकि अन्य खेलों पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। मगर अन्य खेलों के खिलाड़ी कितनी कुर्बानियां देश के लिए देते हैं आज हम आपको इसकी एक मिसाल बताएंगे। हाल ही में भारतीय महिला हाकी खिलाड़ी लालरेमसियामी एफआईएच हॉकी टूर्नामेंट में जापान को हराकर अपने गांव कोलासिब पहुंचीं। पिछले शुक्रवार को उनके पिता का देहांत हो गया था। मगर उन्होंने अपने खेल को ना छोड़कर जाने का फैसला लिया। जिसके बाद वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाईं।
जीत कर लौटी तो मां ने लगाया गले
दरअसल लालरेमसियामी के पिता की मृत्यु 21 जून यानी कि शुक्रवार को हार्टअटैक के कारण हो गई थी। मगर जापान के साथ एफआईएच वूमेन सीरीज का फाइनल होने के कारण इस महिला हॉकी खिलाड़ी ने अपने खेल को ना छोड़कर जाने का फैसला किया। जिसके बाद भारती महिला टीम ने जापान को हराकर यह सीरीज अपने नाम कर ली। अपने इस फैसले के बाद लालरेमसियामी इस समय सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं। लोग उनके इस फैसले को काफी सराहना दे रहे हैं और साथ में इस फैसले को एक मिसाल ही बता रहे हैं। जब वह वापस लौटी तो उनकी मां ने उन्हें गले से लगा लिया।
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने एफआईएच सीरीज में मिली इस जीत को लालरेमसियामी के पिता को समर्पित किया। इस सीरीज में भारत ने पहले चीनी को 4-2 से हराया। उसके बाद जापान को 3-1 से हराकर हमारी टीम ने फाइनल जीत लिया। ऐसे खिलाड़ी जो अपने देश के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगा देते हैं। उन खिलाड़ियों को सरकार और लोगों द्वारा प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



