‘टीपू सुल्तान’ की तलवार की ये सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान
दोस्तों, आपने आपने इतिहास में कई बार ‘टीपू सुल्तान’ के बारे मेें पढा होगा, पर क्या आप जानते हैं कि कौन था ‘टीपू सुल्तान’। तो आइए आज हम बात करने जा रहे है, ‘टीपू सुल्तान’ के बारे मेें ।
दोस्तों, टीपू का जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली में हुआ था। इनके पिता का नाम हैदर अली और माता का नाम फातिमा फकरून्निसा था। इनके पिता एक प्रसिद्ध धर्म गुरु ‘टीपू मस्तान ऑलिया’ को काफी मानते थे और इन्हीं के नाम पर उन्होंने अपने पुत्र का नाम टीपू सुल्तान रख दिया। इनको शेर-ए-मैसूर के नाम से भी जाना जाता है।
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कहा जाता है की टीपू ने बहुत ही कम उम्र में युद्ध की सभी कलाएं सीख ली थीं और वो बहुत ही कम उम्र में सभी युद्ध कलाओ में निपुण हो गए थे। पहलीबार उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में अंग्रेज़ों के विरुद्ध युद्ध लड़ा और जीत गए। अपने पिता हैदर अली के बाद वो 1782 में मैसूर की गद्दी पर बैठे थे। दरअसल टीपू सुल्तान एक बादशाह बन कर पूरे देश पर राज करना चाहते था लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नही हो पाई।
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दुनियॉ का पहला ‘मिसाइल मैन’ टीपू को कहा जाता है। लंदन के साइंस म्यूजियम में इनके रॉकेट आज भी रखे हुऐ हैं। इनकी मृत्यु 4 मई सन् 1799 को मैसूर की राजधानी श्रीरंगपट्टनम में युद्ध करते हुए थी। सबसे ख़ास बात जो टीपू सुल्तान के बारे में है वो ये इनकी तलवार पर रत्नजड़ित बाघ बना हुआ था। इनकी मौत के बाद ये तलवार, इनके शव के पास पड़ी मिली थी। बाढ़ में उनकी यह तलवार 2003 में 21 करोड में नीलाम हुई थी। इस तलवार का वजन 7 किलो 400 ग्राम है।

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