केरल… यादें बह गईं!
कहा जाता है “जल ही जीवन है” लेकिन यही जल जब औसत से अधिक मात्रा में हो जाता है तो जीवन के लिए संकट बन जाता है। भारत के तीन तटीय राज्य केरल,उड़ीसा व कर्नाटक इस समय इसी समस्या का सामना कर रहे हैं । तीन दिन में आठ सौ अड़सठ लोगों ने अपनी जान गंवा दी है जिसमें मात्र केरल से तीन सौ चौबीस लोगों की मौत हुई है ।
१९२४ के बाद ९४ वर्षों बाद आई इस आपदा ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व को चिंतित कर दिया है। लगभग ढाई लाख लोग अपने घरों को अलविदा कह शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं ।
प्रत्येक व्यक्ति का अपना सपना होता है कि उसका अपना घर हो ।अपने जीवन भर की कमाई से व्यक्ति अपना घर सजाता है, मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
और जब देखते ही देखते सब कुछ जल मय हो जाता है तो न सिर्फ वस्तुएं बहती हैं बल्कि बह जाते हैं उनके अरमान भी और उन वस्तुओं से जुड़ी यादें भी। लेकिन परिस्थिति यह होती है कि व्यक्ति के पास अपने और अपने परिवार वालों की किसी तरह जान बचाने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचता।
सांसों को थामे बैठे इन लोगों के जीवन को हम पहले जैसा तो नहीं बना सकते लेकिन जीवन के लिए इनके संघर्ष में मदद जरूर कर सकते हैं।हमारा छोटा सा सहयोग किसी का तन ढंक सकता है किसी के पेट में अन्न डाल सकता है और किसी मासूम को भूख से तड़पने से बचा सकता ।
मानव के लिए मानवता की ही आवश्यकता होती है आइये हम मिलकर मानवता को सार्थक करें,जीवन के लिए संघर्ष करते इन लोगों के संघर्ष में सहयोग करें ।

