आडवाणी-जोशी पर भाजपा ने छोड़ा चुनाव चलने का अंतिम फैसला
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए वरिष्ठ नेता आडवाणी-जोशी को चुनाव लड़ने या न लड़ने अंतिम फैसला लेने का अधिकार पार्टी ने दे दिया है| उम्मीदवार तय करने में भाजपा स्थायी रूप से मानक तय करने के बजाए जीत की क्षमता और भविष्य की उपयोगिता पर ज्यादा जोर देगी। पार्टी 75 साल के ज्यादा उम्र के नेताओं को भी टिकट दे सकती है, लेकिन उन्हें सरकार या केंंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिलेगी।
वर्गक मंडल के सदस्य वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी व डॉ मुरली मनोहर जोशी :आडवाणी-जोशी के बारे में पार्टी उनकी इच्छा के मुताबिक लेगी। लोकसभा के मैदान में कुछ राज्यसभा सांसद और विधायक भी उतर सकते हैं|आडवाणी-जोशी की तरफ इस बारे में अभी कोई भी बयान सामने नहीं आया है|
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भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की शुक्रवार देर रात तक चली बैठक में लोकसभा चुनावों की तैयारी, विपक्षी गठबंधन, पुलवामा के आतंकी हमले के बाद एयर स्ट्राइक को लेकर बने माहौल और नेताओं के मुद्दे पर लंबा मंथन किया गया। चुनावों के बारे में प्रधानमंत्री के साथ यह पहली बड़ी बैठक थी, इसलिए इसमें सभी मुद्दे सामने रखे गए।
सूत्रों के अनुसार बैठक में 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारने को लेकर कोई मानक तय नहीं किया गया है। राजनीतिक हालात, सक्रियता व जीत के मद्देनजर 75 साल से ज्यादा उम्र के नताओं को टिकट देने का रास्ता खुला रखा गया है।
भाजपा में 75 साल से ज्यादा उम्र के मौजूदा लोकसभा सांसदों में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी, डा मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, भुवन चंद्र खंडूड़ी, करिया मुंडा, हुकुम देव नारायण यादव, विजया चक्षुड़, कलराज मिश्रा, सुमित्रा महाजन प्रमुख हैं। सूत्रों के अनुसार ये से कुछ सांसदों ने खुद ही चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर की है तो कुछ अपने निजी संबंधियों के लिए टिकट चाहते हैं।
पिछले चुनाव में भी यशवंत सिन्हा ने खुद चुनाव नहीं लड़ा था और उनकी जगह उनके बेटे जयंत सिन्हा को टिकट दिया गया था। राज्यसभा सांसदों और विधायकों में से भी कुछ नेताओं को लोकसभा का चुनाव फया जा सकता है। यह उस क्षेत्र के समीकरणों पर निर्भर करेगा।
आडवाणी-जोशी को चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला लिए जाने से इतर| इंडिया अलाइव के सूत्रों के अनुसार भाजपा नेताओं ने पुलवामा के बाद सरकार की एयर स्ट्राइक से बारी माहौल की भी समीक्षा की है। पार्टी का मानना है कि इसका असर पूरे देश में पड़ा है और विपक्षी गठबंधन से पड़ने वाला विपरीत असर भी कम हुआ है।
पार्टी का मानना था कि बीते दिसंबर में तीन राज्यों में हार से जो माहौल बना था, वह भी खत्म हो गया है और अब लोग भाजपा व मोदी की तरफ देख रहे हैं। बैठक में पिछले तीन महीने के पार्टी के कार्यक्रमों को मिली सफलता व कार्यकताओं की बढ़ी सक्रियता को लेकर भी चर्चा हुई।
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy



