तीन तलाक पर दिए गए अध्यादेश को मंजूरी मिली
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज तीन तलाक़ बिल संशोधन के बारे में बहुत बड़ी जानकारी देते हुए कहा कि तीन तलाक पर दिए गए अध्यादेश को मंजूरी मिल चुकी है । मौजूदा केंद्र सरकार ने तीन तलाक बिल को अपराध बनाने वाले बिल को मंजूरी दे दी है।
तीन तलाक बिल से मुस्लिम महिलाओं को काफी आशाएं हैं तीन तलाक बिल के संशोधन में और उनके अध्यादेश में निम्न तथ्यों का समन्वय किया गया है।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया की तीन तलाक से जुड़े अपराध संज्ञान में तभी लिए जाएंगे जबकि पीड़ित महिला स्वयं शिकायत करेगी । इसके साथ साथ उसके खून या फिर रिश्तेदार संबंधित कोई व्यक्ति के पास भी शिकायत करने का पूर्ण रूप से अधिकार होगा इस मामले में महिला की पड़ोसी या फिर किसी अनजान व्यक्ति की शिकायत पूर्ण रूप से नकार दी जाएगी और वह मान्य नहीं होगी ।
केंद्रीय मंत्री ने तीन तलाक़ बिल संशोधन के बारे में बताते हुए कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए है अगर किसी मामले में समझौते वाली स्थिति आती है तो महिला के मंजूर होने पर ही समझौता होगा लेकिन इसके साथ साथ मजिस्ट्रेट के नियम व शर्तों का भी ध्यान रखना होगा ।
तीन तलाक के बिल में जमानत होने का भी प्रावधान बनाया गया है इस बिल के अनुसार किसी भी मामले में जमानत हिंदी जा सकती है परंतु इसके लिए सबसे पहले महिला का पक्ष सुनना होगा और उसके बाद अदालत निश्चित करेगी की जमानत होगा या नहीं निजी मामला होने की वजह से महिलाओं का पक्ष सुनाना जरूरी है ।
तीन तलाक़ बिल संशोधन होने के बाद अब इस बिल में गुजारे का भी प्रावधान है केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि तीन तलाक के मामले में पति पत्नी के अलग हो जाने पर बच्चों की कस्टडी मां के पास हो की वक्रता उनको गुजारे के लिए आर्थिक मदद प्रदान करेगा वह कितने आर्थिक मदद प्रदान करें यह निश्चित सीमा मजिस्ट्रेट व अदालत के द्वारा तय की जाएगी ।
केंद्रीय मंत्री ने इस अध्यादेश की सूचना के साथ साथ तीन तलाक बिल से जुड़े मामलों के बारे में भी बताया उन्होंने बताया कि 2017 के जनवरी से लेकर के सितंबर 2018 तक में लगभग चार सौ पचास मामले तीन तलाक के सामने आए हैं जिसमे से सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले के 229 मामले है । सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से आये है ।

