उद्योग क्षेत्र पर कोरोना के असर की आज होगी समीक्षा
अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने में जुटी केंद्र सरकार के सामने चीन के कोरोनावायरस ने नई चिंता पैदा कर दी है। सरकार ने भी इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति ने मौजूदा हालात की समीक्षा की। बुधवार को इस मुद्दे पर फिर बैठक बुलाई गई है। इस बैठक का अहम उद्देश्य उद्योग क्षेत्र पर कोरोनावायरस से पढ़ रहे असर को जानाना। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया, ‘इस सप्ताह चीन से आयात प्रभावित होने से जिन उद्योगों पर असर पड़ रहा है उनके लिए कई उपायों पर विचार किया जा रहा है।’
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उन्होंने कहा कि पीएमओ से भी विचार-विमर्श जारी है। सरकार की सीआईडी फिक्की को निर्देश दिया गया है कि वह महामारी के संभावित असर पर रिपोर्ट सरकार को दें। इन रिपोर्टों में स्थिति को लेकर सतर्क किया जाएगा। वित्त मंत्री ने 2 दिन पहले ही संकेत दिया था कि बजट के बाद भी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाया जा सकते हैं।
भारत के लिए चीन बड़ा कारोबारी साझेदार देश ही नहीं बल्कि रसायन, फार्म यूटिकल्स समेत कई उत्पादों की वैश्विक उत्पादन श्रृंखला में हिस्सेदार भी है। दोनों देशों के बीच 90 अरब डॉलर का व्यापार भी होता है। भारत के 20 उत्पादों का सबसे ज्यादा आयात चीन करता है।

इन 20 उत्पादों में चीन की हिस्सेदारी लगभग 83 फ़ीसदी है। भारत अपनी जरूरत का 90 फ़ीसदी सोलर पैनल चीन से लेता है जबकि कुल बल्क ड्रग्स आयात का भी दो तिहाई से ज्यादा हिस्सा चीन से ही भारत में आता है। इसके साथ-साथ कई अन्य अहम व्यापार का आयात और निर्यात चीन से जुड़ा हुआ है। निश्चित तौर पर इतने व्यापक स्तर पर हो रहे व्यापार पर अचानक से रुकावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना लाजमी है। अब कोरोना वायरस का संक्रमण उद्योग क्षेत्र पर कितना है इसका आकलन इस बैठक पर वित्त मंत्री सीतारमण की अध्यक्षता में समझा जाएगा।

