ससुराल वालों की क्रूरता से पीड़ित महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत
भारत देश में ससुराल वालों की हड़ताल से पीड़ित महिलाओं की संख्या बहुत ज्यादा है। अक्सर ही हमारे देश में लगभग हर राज्य से ऐसे मामले आते रहते हैं। जहां पर महिलाओं को कभी दहेज के नाम पर तो कभी बेटी के जन्म होने पर ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जाता है और वह उनका अत्याचार सहने को बाध्य रहती हैं। ऐसी महिलाओं पर होने वाले अत्याचार या तो सामने नहीं आ पाते या फिर वह सम्मान के डर से पुलिस तक नहीं पहुंच पाती हैं। जिस कारण यह मामले दब जाया करते हैं। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी संख्या ज्यादा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने ससुराल द्वारा प्रताड़ित महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए एक फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि जो महिलाएं ससुराल द्वारा प्रताड़ित करके घर से निकाल दी जाती हैं या फिर वह रहने के लिए कहीं और चली जाती हैं। ऐसी महिलाओं को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अपने वैवाहिक स्थल पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह तत्कालिक समय पर जहां पर रह रही हैं वहीं पर वह प्राथमिकी दर्ज करा सकती हैं और वह मान्य होगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के पहले महिला को वहीं पर रिपोर्ट दर्ज करानी होती थी जहां पर उसका ससुराल होता था। अब महिला चाहे अपने मायके में रह रही हो या कहीं और पर वह वहीं पर अपने ससुराल वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा सकती है और पुलिस भी वहीं से जांच की कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी। महिला यह रिपोर्ट आई पी सी की धारा 498 ए के तहत दर्ज करा सकती है। इसके अंतर्गत महिला के साथ ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित करना मारना पीटना गाली गलौज आदि शामिल है।
आईपीसी की धारा 498 ए के तहत कानून महिला को ससुराल वालों से शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने से बचाने हेतु बनाए गए हैं। इसमें यदि ससुराल वालों की तरफ से सास-ससुर पति नरेंद्र कोई भी महिला को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।

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