लोकसभा चुनाव के दौरान 15 दिनों में पार्टियों को मिला हजारों करोड़ रुपए का चंदा
लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की खूब बल्ले बल्ले रही। उसका कारण यह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान 15 दिनों में राजनीतिक पार्टियों को हजारों करोड़ रुपए चंदे में मिले। इलेक्टोरल बांड के जरिए अन्य अन्य जगहों से राजनीतिक दलों को खूब पैसे मिले। इस बात का खुलासा आरटीआई के द्वारा किया गया है। जहां एक तरफ चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की गोपनीयता को भंग करने की बात चुनाव आयोग द्वारा चल रही थी। वही चुनाव के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में राजनीतिक दलों को चंदा मिलना काफी चौंकाने वाला है। इस बात से यह पता लगाया जा सकता है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां कितनी भारी मात्रा में पैसे खर्चा करती हैं और आपने वोट बनाती हैं।
चंदे में मिले हजारों करोड़ रुपए
दरअसल एक आरटीआई द्वारा यह खुलासा हुआ है कि 6 मई 2019 से लेकर 24 मई 2019 तक में राजनीतिक दलों को कुल 8000 करोड रुपए चंदे में प्राप्त हुए। यह पैसे राजनीतिक दलों को चुनावी बांड के जरिए मिले। दरअसल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बांड बनाए हैं। जिसके जरिए राजनीतिक दलों को यह हजारों करोड़ का चंदा दिया गया। एसबीआई की 29 शाखाओं में चुनावी बांड की सुविधा मौजूद है। इन 15 दिनों में कारपोरेट घरानों ने राजनीतिक दलों के ऊपर खूब पैसों की बारिश की।
दरअसल जिस चुनावी बांड से राजनीतिक दलों को पैसे दिए जाते हैं। उसके लिए महीने के पहले 10 दिनों तक जाकर एसबीआई बैंक से चुनावी बांड खरीदना पड़ता है। यह चुनावी बांड ₹1000, ₹10000, ₹100000, 1000000 रुपए और एक करोड़ रुपए तक के हो सकते हैं। इन चुनावी बांड को टेस्ट के द्वारा नहीं खरीदा जा सकता और बॉन्ड खरीदते वक्त यह बताने की भी जरूरत नहीं है कि वह इस चुनावी बांड को किस राजनीतिक दल के लिए खरीद कर ले जा रहे हैं। राजनीतिक दलों को मिलने वाले 8000 करोड रुपए केवल इस चुनावी बांड से आए हैं।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



